संस्कृत एवं संसकृति प्रचारिणी महासभा का रक्षाबंधन एवं विश्व संस्कृत दिवसोत्सव सम्पन्न।
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Published - 31 August 2026 31 views

जौनपुर। २८ अगस्त२०२६ई०को जनपदजौनपुरके निराला आश्रम राम नगर घघरिया मे श्री संस्कृत एवंसंस्कृतिप्रचारिणीमहा सभा तथा
अखिल भारतीय जन सहयोगी मञ्च के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया!
पावन रक्षाबंधन एवं विश्व संस्कृत दिवसोत्सव,जिसमे'धर्म औरसंस्कृति की राजधानी वाराणसी के १३वर्षीय बाल कला कार मास्टर विराट
विराट द्विवेदी बाल गंधर्व ने राग भोपाली मे गणेश वन्दना प्रथम नमन गण नायक चरना अमित विघन अरुमति भ्रम रहनाऔर सरस्वती वंदना जयति जय जय माँ सरस्वतिजयति वीणा धारिणी से कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ तत्पश्चात छेत्र के एकअनोखे संस्कृताचार्य डाक्टर राम अकबाल यादव ने सहभा गियो के स्वागत में बहु प्रचलित (अब लगभग विस्मृत )श्लोक-
पयसा कमल'
कमलेन पय:
पयसा कमलेन
विभाति सर:
मणिना वलयं
वलयेन मणि:
मणिना वलयेन
विभाति कर:
शशिना च निशा
निशया च शशि:
शशिना निशया च
विभाति नभ:
भवता च सभा
सभया च भवान्
भवता सभया च
विभाम वयम्!
उन्होने संस्कृत की दशा-दिशा को रेखा कित करते हुए कहा कि आज समाज और सरकार दोनो'
संस्कृत भाषा की उपेक्षा में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है',उन्होंने इस संदर्भ
अनुभव सुनाते हुए कहा मैं अपने समय के छात्र जीवन में अच्छे विद्यार्थियों मे गिना जाता था,वहाँ
से निकल बी ए ड किया किन्तु न तो संस्कृत विद्यालयो"और न अन्य विद्यालयो' में मुझे सेवा का अवसर मिला,क्यो कि मैं उनकी मा' ग के अनुसार नोटों की गठरी नहीं दे सका वैष्णवी के गीत का वाचन हुआ-
शङ्खनाद से गूंज
रहा अंबर का कोना कोना है
हमें सत्य के पथ पर
चल कर स्वर्ण सबेरा बोना है।
इस क्रम को बढाते हुए बाल कवि सम्राट पाण्डेय "कान्हा"ने संस्कृति गीत सुना कर कार्यक्रम की
सार्थकता सिद्ध कर दिया-
हम भारत के रखवाले हैं,
सत्यसनातन के मतवाले हैं,
अत्याचार हम सहन न करते,
हम तो आफत के पर काले है'
इसके बाद दूरस्थ रचना कारो'ने वीडियो,वाट्स एप्प तथा फोन से काव्य पाठ प्रस्तुत किया जिनके शुभ नाम हैं
बिहार से बी एस एफ जवान श्री चन्द्र गुप्त नाथ तिवारी, मुंबई से खडी बोली और ब्रज भाषा के सरस रचनाकार सुशील कुमार पाण्डेय"सरस",प्रताप गढ के प्रसिद्ध कवि पण्डित राजेंद्र प्रसाद पाण्डेय
"गडबड",जनपद जौनपुर के हास्य व्यंग्य केबवंडर
उदय राज मिश्र "उजड्ड",मिर्जापुर के महाकवि श्री विवेकानन्द चौबे,कार्यक्रम के आयोजक -सञ्चालक
"निराला"यमदग्निपुरी ने सहभागियो'की प्रस्तुति की प्रशंसा करते हुए कहा कि ये रचनाए' भविष्य में
समाज की विसंग-तियो,विद्रंपताओ'के विरुद्ध एक सशक्त साधन सिद्ध हो'गी ।
भारत की आन बान शान है संस्कृत,
भारत की भारतीयताकी पहचान है संस्कृत।।
संस्कृत के बिना भारत की कल्पना न कीजिए
भारत तो मात्र देह है किन्तु प्राण है संस्कृत
संस्कृत और संस्कृति का महत्व प्रतिपादित
करते हुए कहा संस्कृत और संस्कृति का अन्योन्याश्रय संबंध निराला हैएक की चर्चा करते
ही खुल जाता दूसरे का ताला है,कोरे राष्ट्रवाद राष्ट्रवाद चिल्लाने से कुछ नही' होगा सा'स्कृतिक राष्ट्र वाद से ही बस सब का हित होने वाला है!
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