पंडित मनोज त्रिपाठी ने किया शंका समाधान:- होलिका दहन व रंग भरी होली होगी इस दिन ।
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Published - 01 March 2026 370 views

जौनपुर। धर्म सिंधु निर्णय के अनुसार, होलिका दहन हमेशा भद्रा रहित समय में करना चाहिए।
यदि 2 मार्च 2026 दिन सोमवार की बात करें, तो उस दिन प्रदोष काल में पूर्णिमा तो है, लेकिन भद्रा भी लग रही है, इसलिए यह समय पूरी तरह शुभ नहीं माना जा रहा. वहीं, 3 मार्च 2026 दिन मंगलवार को भद्रा नहीं है।

हालांकि उस दिन प्रदोष काल में पूर्णिमा नहीं मिल रही, लेकिन प्रातः काल के समय पूर्णिमा होने के कारण सायं काल 6:47 चंद्र ग्रहण के मोक्ष के उपरांत होलिका दहन शुभ है।अतः होलिका दहन का शुभ कार्य 3 मार्च 2026 दिन मंगलवार को सायं काल 6:47 के उपरांत तथा रंगों की होली का उत्सव 4 मार्च 2026 दिन बुधवार को बिना किसी भ्रम के पूर्ण रूप से मनायी जाएगी।

फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा 3 मार्च 2026 दिन मंगलवार को ग्रस्तोदित खंडग्रास चंद्र ग्रहण भारतवर्ष में दृश्य मान है।यह ग्रहण भारतीय मानक समय के अनुसार प्रारंभ मध्यान 3:20 पर ग्रहण काम सायं 05:04 मिनट पर तथा ग्रहण का मोक्ष रात्रि 6:47पर होगा।
फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा 3 मार्च 2026 दिन मंगलवार को पड़ने वाले चंद्रग्रहण का सूतक प्रातः काल 07:20 बजे से प्रारंभ हो जाएगा| ग्रहण सूतक स्पर्श के समय से ही देवालयों के पट पूजन के उपरांत बंद कर दिए जाएंगे तथा रात्रि 06:47 बजे ग्रहण मोक्ष के उपरांत पुन: गंगाजल से धोकर आरती व पूजन प्रारंभ होगा।
ग्रहण की अवधि के 1 घंटे पूर्व गर्भवती महिलाएं अपने लंबाई के बराबर कच्चा सूत नाप कर सीधी दीवाल पर टेप के सहारे से चिपका दें |
गाय के गोबर के रस से गर्भ को रक्षित कर दें| ग्रहण की अवधि के समय सुई,कैंची चाकू आदि का प्रयोग,पैरों को मोड़ कर बैठना तथा निद्रा लेने से बचें|धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन सस्वर व भजन पूजा-पाठ आदि करें या सुनें| ग्रहण के सूतक काल में बालक, वृद्ध व सभी प्रकार के रोगी सूतक के नियमों से वंचित होंगे| परंतु भोज्य पदार्थों को गाय के गोबर के रस,कुशा, गंगाजल , तुलसी पत्र आदि से रक्षित व पवित्र करके ही रखें तथा उसका पान करते रहें|

ग्रहण मोक्ष के 1 घंटे उपरांत जल में गंगा जल मिलाकर स्नान कर पूरे घर को पवित्र कर दें। गर्भवती महिलाएं दीवाल पर लटके सूत को किसी मंदिर या पीपल बृक्ष में लपेट दें||
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