इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ का बड़ा आदेश: - तकनीकी सहायक पद पर भर्ती में बोर्ड की लापरवाही उजागर, स्पेशल अपील के बाद खुला नियुक्ति का रास्ता।
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Published - 21 May 2026 49 views

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में युवाओं के भविष्य और रोजगार से खिलवाड़ करने वाले लापरवाह अफसरों को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने आड़े हाथों लिया है। कोर्ट के कड़े और बेहद सख्त रुख के आगे आखिरकार खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड को घुटने टेकने पड़े हैं और अपनी 'गंभीर लापरवाही' स्वीकार करनी पड़ी है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए माननीय न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने बेहद कड़ा रुख अपनाया और शासन के अपर मुख्य सचिव (खादी एवं ग्रामोद्योग), उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) के सचिव और बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) को सीधे तलब करते हुए 15 जुलाई 2026 तक लिखित अनुपालन आख्या (Compliance Report) पेश करने का अंतिम अल्टीमेटम दे दिया है।
*एक योग्य युवा के खिलाफ साजिश: टॉपर को किया बाहर, कम नंबर वालों को दी नौकरी।
यह पूरा मामला बहराइच के रहने वाले अरविंद कुमार तिवारी का है, जिन्होंने वर्ष 2016 में UPSSSC द्वारा निकाली गई 'तकनीकी सहायक रेशा' (सामान्य श्रेणी) की भर्ती परीक्षा में भाग लिया था। लिखित परीक्षा में अरविंद कुमार तिवारी ने सर्वाधिक (सबसे ज्यादा) अंक प्राप्त किए थे। लेकिन, उन्हें नौकरी देने के बजाय विभाग की एक तत्कालीन समिति ने एक अजीबोगरीब और हास्यास्पद बहाना बनाया। समिति ने अरविंद को यह कहकर बाहर का रास्ता दिखा दिया कि "ये सनई के रेशे के लिए प्रशिक्षित नहीं हैं, इनका प्रशिक्षण वस्त्र रसायन (Textile Chemistry) में है"। हैरान करने वाली बात यह थी कि ठीक इसी योग्यता और इसी संस्थान (खादी ग्रामोद्योग विद्यालय, पटरंगा, बाराबंकी) से पढ़े अन्य अभ्यर्थियों के प्रमाण-पत्रों को विभाग ने चुपचाप मान्य कर लिया था।
रिट कोर्ट से लेकर स्पेशल अपील तक: इन अधिवक्ताओं ने लड़ी आर-पार की जंग।
इस घोर अन्याय के खिलाफ पीड़ित अभ्यर्थी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। शुरुआत में समय बीतने (Delay) के तकनीकी आधार पर कोर्ट ने इस रिट याचिका (Writ-A No. 1755 of 2023) को डिस्पोज कर दिया था। लेकिन योग्य अभ्यर्थी को न्याय दिलाने के लिए अड़े अधिवक्ता अभिषेक कुमार द्विवेदी, आबिद अल्वी और वर्षा सिंह ने हार नहीं मानी। वे इस तकनीकी आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट की खंडपीठ (डबल बेंच) में स्पेशल अपील संख्या 165/2026 लेकर गए। स्पेशल अपील में जब इन वकीलों ने अधिकारियों की इस सोची-समझी मनमानी का पर्दाफाश किया, तो कोर्ट का पारा चढ़ गया। खंडपीठ के सख्त रुख के बाद आखिरकार इस मूल रिट याचिका में सुनवाई दोबारा शुरू हुई और कोर्ट ने अफसरों को कटघरे में खड़ा कर दिया।
*कोर्ट रूम में दिखे 'जस्टिस राजीव सिंह, के तीखे तेवर, अफसरों के फूले हाथ-पांव।
सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम का माहौल बेहद गर्म था। माननीय न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने अधिकारियों की इस मनमानी और तानाशाही पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट के कड़े रुख और तीखे तेवरों को भांपते हुए विभाग के बड़े अधिकारी और सरकारी वकील बगलें झांकने लगे। जस्टिस राजीव सिंह ने साफ कर दिया कि किसी भी योग्य अभ्यर्थी के भविष्य के साथ ऐसा खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोर्ट के इसी भारी दबाव और फटकार का नतीजा था कि खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड को आनन-फानन में उच्चस्तरीय आंतरिक बैठक बुलानी पड़ी।
घोटाले और फर्जीवाड़े के भंडाफोड़ का डर: खुद को बचाने के लिए विभाग ने आनन-फानन में बैठाई जांच।
अधिवक्ताओं द्वारा कोर्ट में किए गए तीखे प्रहारों से विभाग के इस बड़े भर्ती घोटाले और धोखाधड़ी (Fraud) की पोल खुलने की पूरी नौबत आ गई थी। सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों को यह डर सताने लगा था कि यदि कोर्ट ने इस मामले में स्वतंत्र न्यायिक जांच या सीबीआई जांच का आदेश दे दिया, तो तत्कालीन समिति के कई बड़े अफसर जेल की सलाखों के पीछे होंगे। इसी घोटाले और फर्जीवाड़े को छुपाने तथा खुद की चमड़ी बचाने के डर से विभाग ने आनन-फानन में खुद ही एक उच्चस्तरीय आंतरिक जांच कमेटी का गठन कर दिया और आनन-फानन में कार्रवाई करने का ढोंग शुरू कर दिया।
"आंतरिक जांच रिपोर्ट में फूटा बम: बोर्ड ने माना—"अफसरों ने किया अन्याय, हुई स्पष्ट लापरवाही"।
कोर्ट की फटकार के बाद संयुक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी सिद्धार्थ यादव की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय जांच समिति ने जब फाइलों को खंगाला, तो अधिकारियों के होश उड़ गए। बोर्ड ने अपनी आधिकारिक रिपोर्ट (Minutes of Meeting) में लिखित रूप से माना कि:
नियमों और बोर्ड की सेवा विनियमावली-2005 के तहत शैक्षिक योग्यता में 'सनई के रेशे' में प्रशिक्षण की कोई शर्त थी ही नहीं। तत्कालीन अफसरों ने जानबूझकर नियमों के विपरीत जाकर अरविंद कुमार तिवारी का अभ्यर्थन निरस्त किया।
बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में काले अक्षरों में लिखा—"यह कृत्य समिति की स्पष्ट लापरवाही एवं उदासीन कार्यप्रणाली को परिलक्षित करता है। निर्धारित नियमों व विधिक प्रावधानों के विपरीत कार्य किया जाना किसी भी परिस्थिति में न्याय संगत अथवा स्वीकार्य नहीं माना जा सकता।"
इसी पद पर पूर्व में चुने गए एक अभ्यर्थी ने नौकरी ज्वाइन नहीं की थी, जिसके कारण पद खाली पड़ा है।
अब नौकरी देने की मजबूरी, कोर्ट ने मांगा जवाब।
अब इस मामले में खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) शिशिर ने शासन के विशेष सचिव को पत्र भेजकर अरविंद कुमार तिवारी को तुरंत नियुक्ति देने के लिए अनुमति और मार्गदर्शन मांगा है।
जस्टिस राजीव सिंह ने बोर्ड की इस जांच रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेते हुए आदेश दिया है कि अगली तारीख तक अपर मुख्य सचिव, UPSSSC सचिव और बोर्ड के CEO इस पर की गई पूरी कार्रवाई और अनुपालन की लिखित रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करें। इस आदेश के बाद से ही उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों और भर्ती बोर्डों में हड़कंप मचा हुआ है।
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