एक देश में दो निशान, दो प्रधान और दो विधान नहीं चलेंगे का उनका नारा केवल एक उद्घोष नहीं, बल्कि अखंड भारत के लिए उनका संकल्प था : - संचिता सिंह चौहान।

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