भाग्यं फलति सर्वदा.... :- जितेन्द्र कुमार दुबे✍️।
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Published - 12 September 2026 12 views

भाग्यं फलति सर्वदा....!
स्वजनों और परिजनों ने
माथे पर तिलक-अक्षत लगाया....
दरवाजे पर पानी से भरा....
फूल का लोटा रखा....
और डाला उसमें सिक्का...
खाने के लिए दिया...दही-गुड़...
संग इसके....दिन के अनुसार...
अन्न-दाना या फिर मसाला दिया..
और दाहिनी जेब में रखा.....!
लाल रुमाल में पीपल का पत्ता...
ज्योतिष के अनुसार शुभ लग्न में
घर से विदा किया उसको....!
इस उम्मीद में कि....घर में....
एक नया दीपक प्रकाशमान होगा
जो...रोशनी करेगा...जगमगायेगा
अपने गाँव-देश और समाज में....
अब जबकि....भाग्य में उसके....
लिखा है....राह में खाली बाल्टी...
काली बिल्ली का राह काटना...
किसी का छींक मारना....
सियार सामने आ आना...
या फिर...अपशकुनी व्यक्ति का...
अनायास सामने आना.....
फिर तो....मान्यता के अनुसार...
सारे खटकरम और टोटके....!
फेल होने तय ही मानो....
अब अगर उस व्यक्ति का....!
सत्कर्म फलीभूत हो जाए...और..
अचानक ही उसके हाथ....!
कोई बड़ी सफलता लग जाए....
फिर....विश्वास मानिए....
टॉस ही करना होगा....
यह तय करने को कि....
कौन सा कथन प्रासंगिक है...
और आज के दौर के सापेक्षिक है
कर्मण्येवाधिकारस्ते....या फिर...!
भाग्यं फलति सर्वदा....!!

रचनाकार - जितेन्द्र कुमार दुबे
अपर पुलिस उपायुक्त, लखनऊ
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