लगातार मिल रही हार से बौखलाई कांग्रेस अपनी राजनीतिक नाकामियों को छिपाने के लिए बार-बार देश की संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कर रही है: - अजीत प्रजापति।
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Published - 28 September 2026 14 views

जौनपुर । उत्सव मोटल में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष अजित प्रजापति ने विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग पर उठाए गए सवाल विस्तार से चर्चा की उक्त अवसर पर राज्य सभा सांसद सीमा द्विवेदी लोकसभा के प्रत्याशी कृपा शंकर सिंह पीयूष गुप्ता अजय सिंह जिला मीडिया प्रभारी आमोद सिह प्रद्युम्न तिवारी उपस्थित रहे।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक कमजोरियों पर आत्ममंथन करना चाहिए प्रशासनिक एवं संवैधानिक विषयों को राजनीतिक ढाल बनाकर जनता के बीच भ्रम पैदा करने से कांग्रेस की समस्याओं का समाधान नहीं होगा लगातार मिल रही हार से बौखलाई कांग्रेस अपनी राजनीतिक नाकामियों को छिपाने के लिए बार-बार देश की संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कर रही है। लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करने के बजाय कांग्रेस और उसके नेता जनादेश का अनादर करने की अपनी पुरानी आदत से बाज नहीं आ रहे हैं।
कांग्रेस के तमाम बड़े नेता जान चुके हैं कि संवैधानिक व्यवस्था एवं लोकतान्त्रिक प्रक्रिया में वे अब जनता का विश्वास पुनः हासिल नहीं कर सकते हैं यही वजह है कि वे पूरे जनतांत्रिक सिस्टम पर भ्रम एवं झूठ फैलाकर, उन्हें ध्वस्त करना चाहते हैं इसी रणनीति के तहत वे संवैधानिक संस्थाओं पर अनर्गल हमला करते हैं। कांग्रेस जब भी चुनाव हारती है, तब-तब वह चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक संस्थाओं को बदनाम करने की साजिश रचती है। अपनी जमीनी विफलता से जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के झूठे और बेबुनियाद बयान दिए जाते हैं।
चुनाव आयोग के संयुक्त बयान से कांग्रेस और विपक्षी इंडी गठबंधन के झूठ का पर्दाफाशः भ्रम और मनगढ़ंत कहानियों की राजनीति पूरी तरह ध्वस्त हुई है चुनाव आयोग की बैठक और संयुक्त प्रेस नोट से दूध का दूध और पानी का पानी हुआ, कांग्रेस व विपक्ष सिर्फ और सिर्फ झूठ, सनसनी और भ्रम फैलाने का काम कर रहा है। कांग्रेस का झूठ बेनकाब हो गया तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए एसआईआर समेत सभी फैसले, निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाना विपक्ष की हताशा का प्रतीक ।

कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखा पत्र किसी नीतिगत विषय या एसआईआर से संबंधित नहीं था एक अखबार की रिपोर्ट कोरी कल्पना पर आधारित गढ़ी गई कहानी साबित हुई फॉर्म-6 के घोषणापत्र को माननीय सर्वोच्च न्यायालय पहले ही वैध ठहरा चुका है विपक्ष की संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने की साजिश फिर नाकाम हुई है।
कांग्रेस अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाकर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही है चुनाव आयोग की स्पष्टता के बाद कांग्रेस के आरोपों की वास्तविकता सामने आ गई है. ऐसे में कांग्रेस को संवैधानिक संस्थाओं पर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय तथ्यों का सम्मान करना चाहिए जब भी विपक्ष जनता की अदालत में पराजित होता है वह अपनी खीझ और हताशा निकालने के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर झूठे आरोप मढ़ने लगता है। निर्वाचन आयोग पर स्पष्ट और कड़े वक्तव्य ने विपक्ष के सभी और दुर्भावनापूर्ण प्रोपेगेंडा की हवा निकाल दी है।
विपक्ष द्वारा एक तथाकथित पत्र को लेकर जो भ्रम फैलाया जा रहा था, आयोग ने साफ कर दिया है कि केबिनेट सेक्रेटरी को लिखा गया पत्र आयोग की किसी नीति या आईटी प्रभाग से संबंधित नहीं था बल्कि यह प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के प्रशासनिक कार्यप्रणाली तक सीमित आंतरिक मामला था। न तो यह निर्णय आयोग के किसी नीतिगत विषय के खिलाफ था और न ही एक एसआईआर से जुड़ा हुआ था एक अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित रिपोर्ट पूरी तरह से निराधार और काल्पनिक कहानी प्रतीत होती है उस रिपोर्ट में न तो कोई ठोस तथ्य था और न ही सच्चाई। विपक्ष ने एक काल्पनिक और तथ्यहीन लेख को हथियार बनाकर देश के लोकतंत्र और स्वतंत्र चुनाव आयोग पर सवाल उठाने की नाकाम कोशिश की, अब पूरी तरह से बेनकाब हो चुका है।
विपक्ष लगातार फॉर्म-6 को लेकर जनता में भ्रांति पैदा करने का षड़यंत्र रच रहा था। चुनाव आयोग ने दो-टूक कहा है कि एसआईआर के लिए फॉर्म 6 से संत घोषणापत्र को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्ण सही व वैध ठहराया है विपक्ष केवल अफवाहें फैलाता है, जबकि आयोग जमीनी स्तर पर हर मतदाता की भागीदारी सुनिक्षित कर रहा है चाहे वह रैन बसेरों, मजदूरों और बेघरों के लिए विशेष कैंप लगाना हो या छूटे हुए लोगों के घरों पर जाकर बीएलओं द्वारा फॉर्म एकत्र करना हो।

देश की जनता भली-भांति जानती है कि जितने भी राज्यों में चुनाव संपन्न हुए हैं, वे पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र रूप से संपन्न हुए हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल जब चुनाव हारते हैं, तो कभी ईवीएम पर, कभी संवैधानिक संस्थाओं पर तो कभी चुनाव आयोग पर झूठे आरोप लगाते है लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान और उसके बाद एलन मस्क के एक बयान का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने ईवीएम को भारतीय लोकतंत्र के लिए ब्लैक बाक्स दिया था। उन्होंने दावा किया कि संस्थागत पारदर्शिता की कमी है, जबकि चुनाव बार-बार ईवीएम की सुरक्षा और विश्वसनीयता को प्रमाणित कर चुके हैं।

चुनावी प्रक्रिया और आयोग की निष्पक्षता पर सवाल-राहुल गांधी राहुल गांधी ने कई बार आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सत्ताधारी दल के दबाव में काम कर रहा है और यह एक कठपुतली बन चुका है। लेकिन हर बार राहुल गाँधी के झूठ को न्याय की अदालत ने खारिज किया है। ये हर बार झूठे आरोप लगाकर भाग जाते हैं राफेल मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक तकनीकी आदेश को तोड़-मरोड़ कर राहुल गांधी ने मीडिया के सामने दावा किया था कि सुप्रीम कोर्ट ने भी मान लिया है कि चौकीदार चोर है। इस मामले में अदालत द्वारा अवमानना नोटिस जारी किए जाने के बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी थी।

पुलवामा हमले के बाद भारतीय वायुसेना द्वारा पाकिस्तान के बालाकोट में की गई एयर स्ट्राइक के सबूत मांगने और वायुसेना के दावों पर सवाल उठाने के आरोप लगे अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद राहुल गांधी ने बयान दिया था कि चीन के सैनिक हमारे जवानों को पीट रहे हैं सेना और सरकार दोनों ने इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की थी।
राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को देश की संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक लाभ के लिए निशाना बनाना बंद कर जनता से इस झूठे प्रचार के लिए माफी मांगनी चाहिए।
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