लहुरी काशी उकनी के बड़े महाराज नहीं रहे।
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Published - 11 October 2026 10 views

जौनपुर। जनपद के मुंगरा बादशाहपुरक्षेत्र के अन्तर्गत लहुरी काशी के नाम से विख्यात उकनी की गौरवशाली विद्वत्-परम्परा को अपूरणीय क्षति पहुँची है। जौनपुर जनपद के लब्धप्रतिष्ठ विद्वत्-शिरोमणि, नव्यन्याय एवं व्याकरण के प्रकाण्ड विद्वान तथा स्वर्णपदक-विजेता पं. प्रदीप नारायण त्रिपाठी (बड़े महाराज) का गुरुवार, दिनांक 8 अक्टूबर 2026 को प्रातः 7:30 बजे अविमुक्त क्षेत्र काशी में देहावसान हो गया। उन्होंने काशी की पावन धरा पर शिवसायुज्य प्राप्त किया।

बड़े महाराज का सम्पूर्ण जीवन भारतीय ज्ञान-परम्परा, शास्त्र-साधना एवं संस्कृत-वाङ्मय के संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित रहा। नव्यन्याय एवं व्याकरण जैसे गूढ़ शास्त्रों में उनकी असाधारण विद्वत्ता तथा शास्त्रों के प्रति उनकी निष्ठा उन्हें विशिष्ट पहचान प्रदान करती थी। स्वर्णपदक से सम्मानित उनकी विद्वत्ता जौनपुर जनपद की समृद्ध शास्त्रीय परम्परा का गौरव थी।

जीवनपर्यन्त ज्ञानदान को समर्पित बड़े महाराज ने अनेक शिष्यों को शास्त्रों का गहन अध्ययन कराकर उन्हें विद्वान बनाया। उनके द्वारा शिक्षित अनेक शिष्य आज विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत होकर अपने ज्ञान, प्रतिभा एवं कर्तव्यनिष्ठा से समाज की सेवा कर रहे हैं। उनकी गुरु-परम्परा के माध्यम से अर्जित ज्ञान और संस्कार भावी पीढ़ियों तक पहुँचते रहेंगे। इस दृष्टि से उनका जीवन केवल एक विद्वान का जीवन नहीं, अपितु ज्ञान-संवहन एवं गुरु-शिष्य परम्परा की अविरल साधना का प्रेरक उदाहरण था।
उनके निधन से उकनी, मुंगरा बादशाहपुर एवं सम्पूर्ण जौनपुर जनपद के विद्वत्-समाज को अपूरणीय क्षति पहुँची है। उनके महाप्रयाण से संस्कृत-जगत ने एक मूर्धन्य शास्त्रवेत्ता तथा समाज ने एक समर्पित ज्ञान-साधक खो दिया है।
काशी की पावन धरा पर उनका शिवसायुज्य प्राप्त करना उनकी आध्यात्मिक यात्रा का परम पावन प्रसंग है। उनकी विद्वत्ता, साधना, सरलता एवं शिष्य-निर्माण के प्रति समर्पण सदैव श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता रहेगा।
बड़े महाराज का महाप्रयाण एक युगनिष्ठ विद्वान की जीवन-यात्रा का अवसान अवश्य है, किन्तु उनके द्वारा प्रदत्त ज्ञान, संस्कार एवं शास्त्रीय चेतना उनके शिष्यों और भावी पीढ़ियों के माध्यम से चिरकाल तक जीवित रहेंगे।
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