भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग में हारता हांफता लोकतंत्र:- स्थायी आय एवं संपत्ति आयोग का गठन आवश्यक ।
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Published - 03 November 2026 5 views

कुशीनगर। पूर्व विधायक मदन गोबिंद राव ने जन्म दिवस के अवसर पर रामकोला में पुरातन मित्र और कार्य कर्ताओं के मिलन समारोह के बैठक को सम्बोधित करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि

कड़े कानून तथा सुशासन एवं भ्रष्टाचार मुक्त शासन के तमाम दावो तथा सरकारों के घोषणाओं के बाद भारत का संवैधानिक लोकतंत्र भ्रष्ट व्यवस्था से जंग में हारता हुआ असहाय दिख रहा है, शासन करने वाले तमाम राजनीतिक दल एवं शासक अभी तक इस बुनियादी बात को समझने में असफल रहे हैं कि आतंकवाद हिंसा तथा दंगा एवं संगठित अपराधों के पीछे भ्रष्टाचार की ताकत लगी हुई है भ्रष्टाचार पर लगाम लगाए बिना ना तो आर्थिक विषमता समाप्त होने वाली है और ना ही भारत विश्वशक्ति बन पाने की स्थिति में होगा ।

वर्ष 1992-93 के मध्य एक अध्ययन यात्रा पर काश्मीर घाटी के लोगों के बीच बातचीत से मुझे आभास हुआ कि जम्मू कश्मीर की आतंकी हिंसा के पीछे भ्रष्ट तंत्र एवं लुटेरे राजनेता है जो अलगाववाद को हवा देकर कानून व्यवस्था की आड़ में राज्य की संपदा को लूटने का कारोबार चला रहे हैं इस स्थिति का फायदा उठाते हुए विदेशी ताकतों ने रणनीतिक लाभ के लिए आतंकियों को पर्याप्त संसाधन जुटाने में सफलता प्राप्त कर लिया,
व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं संवेदनहीनता के कारण नक्सल आंदोलन को कुछ क्षेत्रों में अनुकूल वातावरण प्राप्त हुआ

देश में समय-समय पर भ्रष्टाचार एवं आर्थिक असमानता तथा महंगाई के खिलाफ बड़े-बड़े आंदोलन पूर्व में होते रहे हैं तथा सरकारे भी बदलती रही है जैसे संपूर्ण क्रांति आंदोलन, बोफोर्स काण्ड आंदोलन, अन्ना हजारे आंदोलन लेकिन जो भी सरकार आई भ्रष्टाचार पर रोक लगाने में विफल साबित हुई है
मैं स्वयं इन्हीं मुद्दों पर कांग्रेस शासन में आंदोलन करते हुए लगभग 14-15 बार जेल की यात्राएं भी की लेकिन कुछ कुछ समय बाद भ्रष्टाचार का दैत्य फिर उठ खड़ा होता रहा है
आधुनिक लोकतंत्र के शक्तिशाली एवं जोखिम उठाने वाले सशक्त प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी एवं उत्तर प्रदेश में योगी जी के मजबूत नेतृत्व के बाद भी सुरसा के मुंह की तरह फैल रहा है भ्रष्टाचार आमजन को हताश एवं निराश कर रहा है।
अधीनस्थ अदालतों में तहसीलों जैसा हालात हो गया है तो थाने,तहसीले संगठित आर्थिक अपराधियों के गिरोह जैसे कार्य कर रहे हैं, बैनामे के बाद खारिज-दाखिल एवं वरासत के मामलों की यदि भौतिक जांच करा ली जाए तो आंखें खुली रह जाएँगी।
कुछ साल पूर्व कुशीनगर जिले के नारायणी नदी के तट पर हो रही अवैध बालू खनन की जानकारी के बाद जब उच्च अधिकारियों के निर्देश पर एक एसडीएम मौके पर पहुंचकर शिकायतकर्ता से पूछ रहे थे की कहां खनन हो रहा है उसी समय वीडियो एवं तस्वीर में नदी तट पर बालू लदें आधा दर्जन ट्रैक्टर-ट्राली उन्हीं के सामने से गुजर रहे थे तथा शिकायतकर्ता लगातार कह रहा था की साहब देख लीजिए बालू लदी ट्रालियां जा रही है लेकिन एसडीएम साहब कहते सुने जा रहे थे कि सब झूठ है मैं तो किसी ट्रैक्टर ट्राली को नहीं देख रहा हूं।
तहसीलों में खुलेआम लेखपाल कानूनगो तो छोड़िए अनेक तहसीलों में केस शीघ्र निस्तारण के लिए तहसील अधिकारी मुवक्किल से सीधे पैसे मांगते हुए देखे जा सकते हैं
जातियों ,मजहब, दलों एवं गुटों में बँटे नागरिक बेबस एवं लाचार बन चुके हैं तथा नियति का खेल मानने लगे हैं , सरकार चलाने वालों के सदिच्छा के बाद भी जिस तरह से बड़े प्रोजेक्ट में टेंडरों को मन माफ़िक डिजाइन कर चहेते फर्मों को उपकृत किया जा रहा है वह गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए।

जनप्रतिनिधि राज्य स्तर पर जिन प्रोजेक्ट को पास नहीं करा पा रहे हैं उन प्रोजेक्टो को ठेकेदार अपने पहल पर पास करा रहा है भ्रष्ट्र तंत्र के खिलाफ आवाज उठने की जगह अनेक जनप्रतिनिधि साझेदार बनते दिख रहे हैं
मेरा व्यक्तिगत अनुमान है कि प्रति माह तहसीलों में 5 से 10 करोड़ एवं थानों में 50 लाख रुपए से अधिक वसूली नागरिकों से की जा रही है। कुछ सत्यनिष्ठ अधिकारी फील्ड एवं राज्य स्तर पर हैं लेकिन वह नदी के बीच टापू की तरह बन गए हैं , मेरा अपना मत है कि केवल भ्रष्टाचार पर रोक लगा दिया जाए तो ग्रामीण बाजार गुलजार तथा बैंकों में बचत दर बढ़ सकती है जो उत्पादन चक्र को बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है
जन सूचना अधिकार अधिनियम को और अधिक प्रभावी, सिटिजन चार्टर के नियमों का उल्लंघन करने वाले पर आपराधिक कार्रवाई, बेलगाम चुनावी खर्च पर रोक तथा आय एवं संपत्ति आयोग बनाकर सभी स्तर के जनप्रतिनिधियों,मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के जिला एवं राज्य स्तरीय पदाधिकारी को उसके दायरे में लाकर भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी जंग की शुरुआत की जा सकती है इसके अतिरिक्त मजबूत एवं स्वतंत्र तथा निष्पक्ष लोकपाल संस्था, अधीनस्थ अदालतों में भ्रष्टाचार रोकने हेतु प्रत्येक कमिश्नरी में न्याय पाल का गठन उपयुक्त उपाय हो सकता है।

इसके साथ ही बदनामी एवं अनर्गल आरोपों से छवि को नुकसान पहुंचाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए कानून में परिवर्तन कर जब तक अदालत फैसला नहीं करते तब तक किसी सूत्र के सहारे किसी भी आरोपी के संबंध में खबर प्रकाशित करने पर रोक लगा दिया जाना चाहिए,
दलीय लोकतंत्र में ईमानदार राजनीतिक कार्यकर्ता बनाना एवं उसे तरासना राजनीतिक दलों का कर्तव्य है यदि किसी मान्यता प्राप्त दल में आधा दर्जन से ऊपर राज्य एवं केंद्र स्तरीय पदाधिकारी या जनप्रतिनिधि आर्थिक एवं गंभीर आपराधिक मामलों में दोषी पाए जाते हैं तो उस राजनीतिक दल की मान्यता पाँच वर्षों तक निलंबित कर देना चाहिए।
याद रहे संभवतया 1971-72 में सिनेमा टिकट का दाम बढ़ाने के खिलाफ महीनों तक पंजाब में चले आंदोलन की तत्कालीन शासन द्वारा की गयी अनदेखी, गुजरात में नवनिर्माण आंदोलन तथा बाद में संपूर्ण क्रांति आंदोलन की आधारशिला बनी जिसके कारण शक्तिशाली सत्ता का पतन हुआ !
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