विधायक डॉ रागिनी सोनकर का कुपोषण और एनामिया के मामले के चलते सरकार पर सदन में बोला हमला।
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Published - 17 February 2026 9 views

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज सोमवार को समाजवादी पार्टी की विधायक डॉ. रागिनी सोनकर ने महिला एवं बाल विकास विभाग की नीतियों और प्रदेश में बढ़ते कुपोषण को लेकर योगी सरकार पर तीखा हमला बोला। डॉ. सोनकर ने तथ्यों और आंकड़ों के साथ सदन को अवगत कराया कि प्रदेश के 50 प्रतिशत से अधिक बच्चे, गर्भवती महिलाएं और किशोरियां अब भी कुपोषण और एनीमिया के शिकार हैं।

सदन में डॉ. रागिनी सोनकर ने सरकार के संस्कारों पर सवाल उठाते हुए कटाक्ष करते हुए कहा, "जहाँ सत्ता पक्ष मातृशक्ति के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करता है, वहीं हम समाजवादी लोग महिलाओं को 'माई' (माँ) स्वरूप मानकर उनके सम्मान की लड़ाई लड़ते हैं।" उन्होंने विभागीय मंत्री से पूछा कि क्या सरकार इन माताओं और बच्चों के दुख को क्यों नजरअंदाज कर रही?
कुपोषण के बढ़ते आंकड़ों पर बोलते हुए डॉ. सोनकर ने कहा कि आज के समय में जब चना ₹80 किलो और दूध ₹66 लीटर है, तब सरकार एक बच्चे के पोषण के लिए मात्र ₹8 और गर्भवती महिला के लिए ₹9 का मानक रखे हुए है। उन्होंने सवाल किया, "यदि एक बच्चे को मात्र 250 मिली दूध भी दिया जाए, तो उसकी कीमत ₹16. 5 होती है। सरकार बताए कि ₹8 में वह बच्चों को 600 किलो कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन कैसे उपलब्ध करा रही है? यह विभाग आज सिर्फ 'गोलमाल और झोलमाल' का केंद्र बनकर रह गया है।"

विधायक डॉ. रागिनी ने विभाग की रीढ़ कही जाने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के शोषण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की आंगनबाड़ी बहनें अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर बैठने को मजबूर हैं। डॉ. सोनकर ने सरकार से मांग की कि क्या सरकार इन महिलाओं को डराना बंद कर उन्हें ₹30,000 प्रति माह मानदेय देने, उन्हें स्थायी (परमानेंट) करने और उन्हें रिटायरमेंट प्लान व स्वास्थ्य बीमा से जोड़ने का काम करेगी?
डॉ. रागिनी सोनकर ने अंत में कहा कि जब तक पोषण के बजट को महंगाई के अनुरूप नहीं बढ़ाया जाता, तब तक उत्तर प्रदेश को कुपोषण मुक्त बनाना असंभव है।
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