महात्मा गाँधी तथा लाल बहादुर शास्त्री द्वारा स्थापित मूल्यों को विद्यार्थी जीवन में चरितार्थ करना चाहिए:- डॉ आशुतोष कुमार सिंह।
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Published - 30 September 2026 77 views

कु. रोशनी उर्फ़ धीरा✍️।
चंपारण। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी एवं जनप्रिय नेता लाल बहादुर शास्त्री जयंती के उपलक्ष्य में 30/09/2026 को राजकीय डिग्री महाविद्यालय, मेहसी, पूर्वी चंपारण, बिहार, अंगीभूत ईकाई बी. आर. ए. बी. यू. के प्राचार्य डॉ. आशुतोष कुमार सिंह तथा महाविद्यालय के शिक्षकगण के संयुक्त संयोजकत्व और राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त तत्वावधान में भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

प्राचार्य डॉ. आशुतोष कुमार सिंह ने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि महात्मा गाँधी तथा जनप्रिय नेता लाल बहादुर शास्त्री द्वारा स्थापित मूल्यों को विद्यार्थी जीवन में चरितार्थ करना चाहिए । सत्य और अहिंसा का मानवीय मूल्य तो गाँधी - दर्शन के केन्द्र में था वहीं शास्त्री जी निर्भीक और निडर नेता थे साथ ही ईमानदार और विनम्र भी। सन् 1964 में लाल बहादुर शास्त्री भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने, उन्होंने इस पद को सुशोभित किया। उनका व्यक्तित्व ‘सादा जीवन उच्च विचार’ का साक्षात् प्रमाण था

राष्ट्रीय सेवा योजना के प्रभारी डॉ. गोविन्द मिश्र ने गाँधी जी द्वारा लिखित आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ के माध्यम से गाँधी दर्शन के मूल्यों तथा उनके जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी बताया कि लंदन में गोलमेज सम्मेलन के दरम्यान जब बापू सम्मलेन में जाने हेतु सीढ़ियाँ चढ़ रहे थे तब विंस्टन चर्चिल ने कहा था लंदन में इस अर्ध नंगे फकीर को सीढ़ियाँ चढ़ते देखना अपने आप में सौभाग्य की बात है।

हिन्दी की शिक्षिका कु. रोशनी ने जननेता, भारतरत्न लाल बहादुर शास्त्री जी के विद्यार्थी जीवन के विकट संघर्षों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि शास्त्री जी शिक्षा के प्रति इतने निष्ठावान थे कि जब उनके पास नाव के लिए पैसे नहीं होते थे, अपनी पुस्तकों को पॉलीथिन की थैली में भरकर, नदी पार कर पढ़ने जाते थे। उनके गाँव और विद्यालय के बीच के नदी पड़ती थी जिसे पार करके जाना पड़ता था। बचपन से ही संघर्षशील शास्त्री जी ने भारत के प्रधानमंत्री पद को गौरवान्वित किया। हमें उन्हीं के भाँति अपने विद्यार्थी जीवन में शिक्षा के प्रति समर्पित और निष्ठावान होना चाहिए।
इतिहास के शिक्षक विजॉय बिसुई ने महात्मा गाँधी द्वारा बिहार के चंपारण में चलाए गए ‘चंपारण सत्याग्रह’ पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि यह आंदोलन किसानों के हित में था।

अंग्रेजी की शिक्षिका डॉ. सुप्रिया चौहान ने शास्त्री जी द्वारा ‘जय जवान जय किसान’ नारा क्यों दिया गया था, उसके इतिहास के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि कैसे भारत- पाक युद्ध के समय जब भारत में आर्थिक विपत्ति और अन्न का संकट आया तब अमेरिका जैसे देश ने मदद के नाम पर यह शर्त रखी कि भारत को युद्ध से कदम पीछे हटाना होगा, जो शास्त्री जी को कतई मंजूर नहीं था; अतः यह नारा अमेरिका जैसे देश के मुँह पर एक तमाचे की भांति था।
हिन्दी के विद्यार्थी पंकज कुमार ने भाषण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया तो वहीं इतिहास के विद्यार्थी विश्वास कुमार ने द्वितीय पुरस्कार प्राप्त किया। प्राचार्य महोदय द्वारा विद्यार्थियों को स्मृति चिह्न सह प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
आयोजन में प्राध्यापकगण हिन्दी के प्राध्यापक डॉ. सुरेश पुवारे, अर्थशास्त्र की काजल वर्मा तथा आरती मेहता, समाजशास्त्र की रेशमा सामल, रौनक फातमा तथा कॉलेज के कर्मचारी संगणक संचालक संजीत कुमार और शशिभूषण उपस्थित थे।
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