मातृशक्ति हेतु श्रीरामचरितमानस के सुंदरकाण्ड का सस्वर पाठ एवं प्रतियोगिता।
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Published - 06 November 2026 7 views

जौनपुर ।मृत्युञ्जय महादेव धाम, उमरछा में आज आयोजित सस्वर सुंदरकाण्ड प्रतियोगिता में माँ सीता गायन मंडली, उमरछा द्वारा भक्तिमय एवं मधुर संगीतमय प्रस्तुति दी गई। मंडली की मातृशक्ति ने अपनी सुमधुर वाणी, सुर-लय और भावपूर्ण गायन से वातावरण को भक्तिरसमय बना दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ पंडित हीरामणि उपाध्याय एवं पंडित रघु श्रेय मिश्र द्वारा विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान श्रीराम, माता सीता एवं हनुमान जी के पूजन-अर्चन से किया गया। तत्पश्चात माँ सीता गायन मंडली ने सुंदरकाण्ड का सस्वर पाठ प्रारंभ किया।
कार्यक्रम के समापन पर सुंदरकाण्ड की प्रस्तुति देने वाली मातृशक्ति—सरोज उपाध्याय, ज्योति शुक्ल, तृप्ति उपाध्याय, रिया उपाध्याय, शिवानी सिंह और आरती गौड़ को कार्यक्रम व्यवस्थापक सुशील कुमार उपाध्याय द्वारा अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर सुशील कुमार उपाध्याय ने अपने वक्तव्य में कहा कि सुंदरकाण्ड केवल धार्मिक पाठ नहीं, बल्कि जीवन में आत्मविश्वास, साहस, सेवा, समर्पण और सकारात्मक सोच का संदेश देने वाला प्रेरणादायी प्रसंग है। हनुमान जी का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति वही है जिसमें अहंकार का स्थान न हो और प्रत्येक सामर्थ्य प्रभु के कार्य एवं समाज की सेवा में समर्पित हो। मातृशक्ति द्वारा धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का यह प्रयास नई पीढ़ी में संस्कारों के संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने कहा कि मृत्युञ्जय महादेव धाम में प्रदोष के अवसर पर आयोजित की जा रही यह सुंदरकाण्ड प्रतियोगिता केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि मातृशक्ति की प्रतिभा को सम्मान देने, धार्मिक चेतना जागृत करने तथा समाज में रामचरितमानस के आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने का एक विनम्र प्रयास है।
पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीरामचरितमानस में सुंदरकाण्ड का विशेष स्थान है। इसमें पवनपुत्र हनुमान जी की भक्ति, शक्ति, बुद्धिमत्ता, साहस, समर्पण और प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट निष्ठा का अद्भुत वर्णन मिलता है।

सुंदरकाण्ड हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी कठिन परिस्थितियाँ क्यों न आएँ, यदि मन में प्रभु के प्रति विश्वास, लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प और कर्म के प्रति समर्पण हो तो असंभव दिखाई देने वाले कार्य भी संभव हो सकते हैं।
सुंदरकाण्ड के पाठ की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसके नियमित श्रवण एवं पाठ से मन में सकारात्मकता, आत्मविश्वास, धैर्य, साहस और मानसिक शांति का भाव विकसित होता है। भक्तजन इसे संकटों में धैर्य एवं प्रभु की कृपा प्राप्त करने का माध्यम मानते हैं।
हनुमान जी का चरित्र हमें यह प्रेरणा देता है कि शक्ति का उपयोग सेवा, परोपकार और धर्म की रक्षा के लिए करना चाहिए।
इस अवसर पर रमाशंकर उपाध्याय, सुधाकर शुक्ल, लालमुनि उपाध्याय, कपिल मुनि मिश्र, सागर शुक्ल, लालजी गौड़, सुरेश उपाध्याय, सूर्यनाथ शुक्ला, अशोक शुक्ल, अरविंद शुक्ल, ढोलन, अभिषेक उपाध्याय, विकास शुक्ल एवं विनोद शुक्ल सहित अनेक श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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